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सरयू नदी का उद्गम कैलाश के पास मानसरोवर झील है। यह नदी पूरे प्रवाह पथ में काली, करनाली, घाघरा, शारदा और सरयू के नाम से जानी जाती है। जहां सरयू नदी को घाघरा के नाम से पुकारा जाता है, वहां इस नदी का ढलान पथ बहुत तीव्र है, जिससे यह नदी ‘घर्घर’ नाद करते हुए बहती है इस कारण इसका नाम ‘घाघरा’ कहा जाता है जब हिंदी भाषा में घाघरा शब्द का तात्पर्य पेटीकोट से लिया जाने लगा था, उससे बहुत पहले सरयू का नाम उसके नाद स्वभाव के कारण घाघरा हुआ है। 

केवल घाघरा नदी का नाम ही उसके आवाज करने के अर्थ में घाघरा नहीं पड़ा, अन्य नदियों के नाम भी उनके आवाज करने के स्वभाव के कारण पड़े हैं। अन्य नदी के रूप में मैं रेवा नाम को उल्लिखित करना चाहूंगा। रेवा शब्द भी ‘रव’ के कारण हुआ। रव का तात्पर्य भी आवाज है नर्मदा अपने तीव्र ढलान पथ के कारण आवाज करते हुए बहती है, इस कारण उसका नाम रेवा पड़ा। “गायति रेवा रव मधुरम्।” 

इसी प्रकार ध्वनि के कारण एक अन्य नदी का नाम भी रखा गया है, वह है गंगोत्री के रास्ते पर हरसिल के निकट बहने वाली कंकड़ गंगा नदी। कंकड़ गंगा नदी का भी नाम कंकड़ गंगा इसलिए पड़ा है, कि वह बहुत आवाज के साथ बहते हुए भागीरथी में मिलती है।
जो मनीषी घाघरा (घर्घरा नाम्नाः), सरयू का मजाक उड़ा रहे हैं वे पहले अक्षर साधना करें।

*Disclaimer – this article is taken from social media platform. Before using this please confirm the authenticity of the details.

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Rupesh
Author: Rupesh

By Rupesh

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