चाणक्य के जासूस

राजकमल प्रकाशन की किताब चाणक्य के जासूस सेवानिव्रत्त गुप्तचर अधिकारी त्रिलोक नाथ पांडेय जी  नई पेशकश है जो जासूसी के गोपन संसार को उजागर करता ऐतिहासिक उपन्यास है .

इस उपन्यास का मेरे हाथ आना भी एक संयोग ही था, बस कुछ दिनों से कुछ अलग पढ़ने की भावना से अपने घर के लाइब्रेरी को खंगाल रहा था,कुछ न मिला तो फिर फेसबुक पे विराजमान हो गया ,तो अनायास फेसबुक पे एक परम मित्र के पोस्ट पे ध्यान गया जिसमें उन्होंने ये बताया कि ये ताक़रीबन 340 पेज की बुक उन्होंने बस पढ़ना शुरु किया तो खत्म कर के ही दम लिया फिर क्या था

कुछ ही दिनों में अमेज़न से त्रिलोक जी की ये किताब हमारे हाथ में थी, इस किताब की कहानी चाणक्य के समय की बीती घटनाओं को ध्यान में रख कर बुनी गई है, एक अलग लेखनी लेखन का स्टाइल और सच मानिए जैसे जैसे आप इसमें गोते लगाते जाएंगे वैसे वैसे आप इसके तिलिस्म में खुद को जकड़ा हुआ पाएंगे आपको देवकी नंदन जी की चन्द्रकान्ता तो याद होगी ही ये किताब आपको भारत के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ कहें अर्थ शास्त्री कहें या रणनीतिकार के तिलिस्म में आपको कैद कर देगा. जैसा कि चन्द्रकान्ता के साथ हुआ था वही रहष्य रोमांच और कथानक ,आपको सब कुछ पढ़ते पढ़ते उस काल में चले जाने को विवश कर देगा।

किसी ने सच ही कहा है कि इतिहास की दिशा बदलने वाले अनाम गुप्तचरों को भावांजली है ‘चाणक्य के जासूस ‘ वो जासूस जो राष्ट्र के लिए जीते मरते हैं

भारतवर्ष के महानतम शिक्षक और कूटनीतिग्य विष्णुगुप्त ‘चाणक्य’ की कार्यशैली एवं गुप्तचर कला  एवं कात्यायन के साथ उनका द्वन्द , नन्द वंश के विशाल साम्राज्य को बिना रक्त बहाये ध्वस्त करने गुप्तचरों की भूमिका और बहुत कुछ . 

चंद्रगुत , के साथ साथ उनके सभी साथी जो गुप्तचर थे , चाहे वो रुद्र हों या तोता सबकी महत्ताओं का तानाबाना  त्रिलोक जी ने जिस तरह  बुना है यकीन मानिए आप सब उसमे खो के रह जाएंगे . अतीत के भारत वर्ष की प्रशासनिक प्रक्रिया या फिर विष से मुक्त करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया सब कमाल का था. विषकन्या कैसे बनायी जाति थीं कैसे उनका उपयोग किया जाता था सब का अद्भुत चित्रण . त्रिलोक नाथ जी के गुप्तचरी जीवन के अनुभव और विषय पे उनकी पकड़ की झलकी है ये किताब. हाँ मैं इसमे सेल्यूकस और चाणक्य का संवाद दूंढ़ रहा था मगर कोई बात नहीं बहुत कुछ है इसमे सीखने की, नए लेखकों के लिए भी और पढ़ने वालों के लिए भी ,

आप सब देर ना करें जाए और किताब खरीद कर पढें । 

रुपेश कुमार
लेखक/ आंतरप्रेन्योर / शिक्षाविद / ब्लॉगर

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rupesh kumar
Author: rupesh kumar

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